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आर्थिक भूगोल की प्रकृति और विषय-क्षेत्र

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Economic Geography meaning, nature and scope - आर्थिक भूगोल विश्व की प्रकृति और विषय-क्षेत्र  Introduction ( भूमिका ) – • 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मानव भूगोल में आर्थिक भूगोल की शाखा का विकास हुआ। • आर्थिक भूगोल का प्रारंभिक स्वरूप वाणिज्यिक भूगोल (commercial geography) के रूप में था। • सर्वप्रथम सन् 1842 में जर्मन विद्वान गोत्ज (Gatz) ने आर्थिक भूगोल को परिभाषित किया जिसके बाद आर्थिक भूगोल का एक स्वतंत्र शाखा के रूप में विकास हुआ। • आर्थिक भूगोल मानव भूगोल की उपशाखा है जिसमें मानव की आर्थिक क्रियाओं का वितरण तथा प्राकृतिक वातावरण के साथ इनके सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है। आर्थिक भूगोल की प्रकृति और विषय-क्षेत्र • मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं में वस्तुओं का उत्पादन, वितरण और विनिमय आदि क्रियाएं आती है। • मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं में क्षेत्रीय विभिन्नता पाई जाती है क्योंकि आर्थिक क्रियाओं को प्रभावित करने वाले कारक सभी स्थान पर समान रूप से कार्य नहीं करते। • समय और स्थान के अनुसार मनुष्य की आर्थिक क्रियाएं बदलती रहती है और मनुष्य अपनी मानसिक व शारीरिक शक्ति के द्वारा नई क्रि...